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जिस घर में पतिवर्ता इस्त्री होती है उनका जीवन सफल हो जाता है। पति की आयु बढ़े इसलिए वह कभी पति के नाम का उचारण नहीं करती। पति के भोजन कर लेने के बाद वह भोजन करती है। पति के सोने पर स्वंय सोती है और पहले ही जाग जाती है पति अगर दूसरे देश में हो तो वह अपने शरीर का श्रृंगान नहीं करती। वह अपने दरवाजें पर उठती या बैठती नहीं। पति की आज्ञा के बिना वह किसी तीर्थ यात्रा या विवाह उत्सव देखने नहीं जाती। भली भाति स्नान करके सबसे पहले पति के ही मुख का दर्शन करे। कभी अकेली न रहे और निर्वस्त्र होकर न नहाए। पाए 400रु का Paytm कैश फ्री, क्लिक करें.
स्त्रियों के लिए ये ही धर्म है कि पति की आज्ञा का उल्लंघन न करना। उसके लिए शंकर और विषणु भगवान से भी बढ़कर उसका पति है। जो पति का आज्ञा का उल्लघन करके त्योहार आदि करती है वह पति की आयु हर लेती है।जो पति की आंख बचाकर किसी दूसरे पुरूष को निहारती है वह है काणी वृक्र्त मुख वाली। पति ही देवता, पति ही गुरू और पति ही सबकुछ है। स्त्री सब कुछ छोड़ कर एक मात्र पति की पूजा करे। पतिवर्ता स्त्री को देखकर यमदूत भी भाग जाते है।
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