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महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को बहुमत मिल गया है, लेकिन दोनों ही दलों में मुख्यमंत्री पद को लेकर खींचतान अब तक चल रही है. इस समय शिवसेना 50-50 के फार्मूले पर अड़ी हुई है और बीजेपी साफ कह चुकी है कि ''पहले से तय समझौते के तहत ही सीएम चुना जाएगा.'' वहीं शिवसेना लगातार अपने मुखपत्र के जरिए बीजेपी पर वार कर रही है.
शिवसेना ने 'सामना' में कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की तारीफ करते हुए लिखा है, ''महाराष्ट्र में राहुल गांधी ने कांग्रेस के प्रचार में वैसी रुचि नहीं दिखाई, परंतु हरियाणा में उन्होंने पार्टी का अच्छी तरह प्रचार किया. सभाएं लीं, रैलियां निकालीं और महत्वपूर्ण यह है कि उनका यह प्रचार कांग्रेस के यश के रूप में भी परिवर्तित होता दिखा. भले ही वहां कांग्रेस सत्ता में आएगी या नहीं आएगी.... ....परंतु नई सरकार के लिए पहले की तरह स्वतंत्र होकर काम करना आसान नहीं होगा. इतनी ताकत मतदाताओं ने कांग्रेस पार्टी को दी है. अर्थात महाराष्ट्र में जो भूमिका कांग्रेस-राष्ट्रवादी कांग्रेस को निभानी चाहिए ऐसा जनता को लगा, वैसा ही हरियाणा में भी मतदाताओं ने कांग्रेस के मामले में किया.''
आगे सामना में लिखा है, ''कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं होगा यह अनुमान हरियाणा में भी झूठा साबित हुआ. बल्कि उस पार्टी ने वहां सीधे 31 सीटों पर कब्जा जमा लिया है.'' महाराष्ट्र में यह पार्टी ‘नेतृत्वहीन’ अवस्था में चुनाव लड़ी फिर भी 45 सीटें हासिल करके उस पार्टी ने अपने अस्तित्व को और भी मजबूत कर लिया. हरियाणा में कांग्रेस पार्टी सिर्फ मजबूत ही नहीं बल्कि प्रबल दावेदार के रूप में ही आगे आई. महाराष्ट्र में कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी मिलकर संख्या बल 100 के आसपास पहुंच गया है.''
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