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चुनाव आयोग द्वारा हमेशा से यह कहा जा रहा है की EVM में छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। लोगो और विपक्षी पार्टी के विरोध के कारन चुनाव आयोग ने EVM के वोट को VVPAT मशीन की पर्चियों के साथ मिलान करने के लिया बूथों पर यह मशीन रखी।VVPAT यानी वोटर वैरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल की पर्चियां EVM का लिटमस-टेस्ट हैं। इनके सहारे EVM की विश्वसनीयता साबित होती है।
अब इस मामले में चुनाव आयोग के दावों की सच्चाई सामने आ गई है। पूर्व आईएएस अधिकारी और चुनाव निर्वाचन अधिकारी रहे कन्नन गोपीनाथ ने मंगलवार को दावा किया कि VVPAT मशीन ने खुद ही EVM को छेड़छाड़ की चपेट में ले लिया। 2012 बैच के अधिकारी रहे गोपीनाथ ने हाल में अपने पद से जम्मू कश्मीर से विशेष दर्ज़ा हटाने के बाद वहा की हालत को देखते हुए लोगो की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आज़ादी और मूलभूत अधिकार जैसी वजहों के कारण इस्तीफा दे दिया था।
गोपीनाथ का दावा है कि VVPAT मशीनों में छेड़छाड़ की आशंका सबसे अधिक हो सकती है। EVM मशीन के साथ ही वोट को सत्यापित करने वाले मशीन में छेड़छाड़ करना काफी आसान है। हालाँकि अभी चुनाव आयोग ने अभी गोपीनाथ के आरोपों का जवाब नहीं दिया है।
24 सितंबर को उन्होंने कई ट्वीट किए गोपीनाथन का कहना है कि VVPAT ने EVM की सुरक्षा को कम किया है। इसके डिफेंस सिस्टम में सेंधमारी की है और VVPAT की वजह से हैकिंग का जोखिम और अधिक पैदा हो गया है।
कन्नन गोपीनाथ ने अपने ट्वीट में लिखा- “आपको EVM के लिए मेरा डिफेंस शायद याद होगा ,मैं अभी भी इसके साथ खड़ा हूं, मगर VVPAT के साथ मेरे पहले चुनावी अनुभव ने मेरा भरोसा छीन लिया है. VVPAT ने EVM की सुरक्षा में सेंधमारी की है। इसकी वजह से EVM से जुड़ी प्रक्रिया को हैक किए जाने का जोखिम है।"
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