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देश की एक ओर बड़ी कम्पनी एस्सेल समूह भी डूबने के कगार पर है. एस्सेल समूह के मालिक है सुभाष चंद्रा जो खुद को अब एक मार्केटिंग गुरु के रूप में पेश करते हैं. सुभाष चंद्रा मौजूदा मोदी सरकार के खासे करीबी माने जाते हैं और भाजपा के रहमो करम से अभी भी राज्यसभा सदस्य बने हुए हैं.
सुभाष चंद्रा की एस्सेल समूह की कंपनियों पर म्यूचुअल फंड और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों का करीब 12,000 करोड़ रुपये का कर्ज है, जिसमें 7,000 करोड़ रुपये एमएफ कर्ज और 5,000 करोड़ रुपये एनबीएफसीज का कर्ज है. इसके कारण देश में एक और IL&FS संकट का खतरा पैदा हो गया है.
साल 2019 की शुरुआत में जी समूह के शेयर बाजार में एकाएक धड़ाम हो गए जानकारों के मुताबिक इसकी तात्कालिक वजह एक मीडिया रिपोर्ट थी जिसमें कहा गया था कि नोटबंदी के बाद नित्यांक इंफ्रापावर नाम की एक कंपनी ने 3000 करोड़ रुपये जमा कराए थे जिसका संबंध एस्सेल ग्रुप की कम्पनियों से होना पाया गया, सुभाष चंद्रा इसके कारण मुश्किल में आ गए और जी समूह पर डिफॉल्ट का खतरा मंडराने लगा.
( ये लेख वरिष्ठ पत्रकार गिरीश मालवीय के फेसबुक पेज से साभार लिया गया है। ये लेखक के निजी विचार हैं।)
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