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अयोध्या विवाद (Ayodhya Vivad) पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले (Supreme Court Ayodhya Judgement) के कुछ बिंदुओं पर हिंदू पक्षकारों को भी ऐतराज है। निर्मोही अखाड़ा (Nirmohi Akhada) और हिंदू महासभा (Hindu Mahasabha) के वकील सुप्रीम कोर्ट (SC) के फैसले के एक-एक बिंदु का गहराई के साथ अध्ययन कर रहे हैं। इन दोनों प्रमुख पक्षों के वकीलों ने संकेत दिया है कि सुप्रीम कोर्ट में उनकी ओर से पुनर्विचार याचिका दाखिल की जा सकती है। मगर इस पर अंतिम निर्णय दोनों संगठनों के सर्वोच्च नेतृत्व की बैठकों के बाद लिया जाएगा।
निर्मोही अखाड़े (Nirmohi Akahada) के वकील रंजीत लाल वर्मा ने बताया कि अगले 4 से 5 दिनों में अयोध्या (Ayodhya) या वृंदावन (Vrindawan) में अखाड़े के पंचों की बैठक होगी। इस बैठक में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के फैसले पर विचार होगा। बैठक में सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्मोही अखाड़े (Nirmohi Akahada) के दावे को खारिज किए जाने के महत्वपूर्ण बिंदु पर चर्चा होगी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई (CJI Ranjan Gogoi) की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने अपने फैसले में कहा कि निर्मोही अखाड़े का दावा कानूनी समय सीमा के तहत प्रतिबंधित है। रंजीत लाल वर्मा के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सुन्नी वक्फ बोर्ड (Uttar Pradesh Sunni Waqf Board) के दावे को कानूनी समय सीमा के तहत प्रतिबंधित नहीं माना और निर्मोही अखाड़े के दावे को उसी आधार पर प्रतिबंधित कर दिया। इसी अहम सवाल को लेकर बैठक में पुनर्विचार याचिका दायर किए जाने पर फैसला लिया जाएगा।
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