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साल 2018 में, LIC ने IDBI में 21,000 करोड़ रुपये का निवेश करके अपने शेयरों में 51 फीसदी की बढ़ोतरी की थी। इस महीने एक बार फिर से केंद्रीय मंत्रिमंडल ने एलआईसी को 9,300 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। इसके बावजूद भी IDBI ने इस साल जून में 3,800 करोड़ रुपये का घाटा उठाया। माकन ने आगे कहा कि एलआईसी के पास 28.84 करोड़ निवेशक हैं और कुल संपत्ति लगभग 31.11 लाख करोड़ रुपये की है।
उन्होंने कहा घरेलू देनदारी बढ़कर 7.40 लाख करोड़ रुपये हो गई हैं, जो आज के समय में चिंता का विषय है। अर्थव्यवस्था के हालात के कारण कई कंपनियों की सेल में गिरावट देखी गई है। इसके पीछे कारण यह है कि डिस्पोजेबल आय कम हो रही है। माकन ने कहा कि बचत का अनुपात घटकर 6 फीसदी रह गया है। कंपनी की बढ़ती देनदारियों के कारण जानकारों का मानना है कि अगर कंपनी इसी तरह नुकसान में जाती रही तो जल्द ही कंपनी के बंद भी हो सकती है।
उन्होंने ट्वीट किया, 'भारत में एलआईसी भरोसे का दूसरा नाम है। आम लोग अपनी मेहनत की कमाई भविष्य की सुरक्षा के लिए एलआईसी में लगाते हैं, लेकिन भाजपा सरकार उनके भरोसे को चकनाचूर करते हुए एलआईसी का पैसा घाटे वाली कंपनियों में लगा रही है।'
एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए, कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता अजय माकन ने कहा कि मोदी सरकार अब तक आईडीबीआई बैंक से लगभग 30,000 करोड़ रुपए का उपयोग कर चुकी है। सरकार के इस कदम से देश के लोगों के पैसे का गलत उपयोग हो रहा है।
साभार : पत्रिका
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